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स तु वैश्रवणस्तत्र तपोवनगतस्तदा।
अवर्धताहुतिहुतो महातेजा यथानल:॥ ९॥
अनुवाद
वहाँ तपोवन में निवास करते हुए कुमार वैश्रवण उस समय हवन से प्रज्वलित अग्नि के समान बढ़ने लगे और महान तेज से युक्त हो गए ॥9॥
Kumar Vaishravana, staying there in the Tapovan, started growing like the fire ignited by the offering at that time and became endowed with great splendor. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥