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ramayan 7.3.34: विश्रवा का धर्मात्मा पुत्र दैत्यों का राजा वैश्रवण उस लंका नगरी में बड़े सुख से रहने लगा, जिसके लिए समुद्र ही खाई थी ॥34॥   |   ramayan सर्ग 7.3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.3.34 
स तु तत्रावसत् प्रीतो धर्मात्मा नैर्ऋतर्षभ:।
समुद्रपरिखायां स लङ्कायां विश्रवात्मज:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
विश्रवा का धर्मात्मा पुत्र दैत्यों का राजा वैश्रवण उस लंका नगरी में बड़े सुख से रहने लगा, जिसके लिए समुद्र ही खाई थी ॥34॥
 
Vishrava's virtuous son Vaishravana, the king of demons, started living with great happiness in the city of Lanka, for which the ocean served as a moat. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)