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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.3.29 
रमणीया पुरी सा हि रुक्मवैदूर्यतोरणा।
राक्षसै: सा परित्यक्ता पुरा विष्णुभयार्दितै:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वह नगरी अत्यंत सुन्दर है। उसके द्वार सोने और नीलम के बने हैं। पूर्वकाल में भगवान विष्णु के भय से त्रस्त होकर दैत्यों ने उस नगरी को त्याग दिया था।
 
That city is very beautiful. Its gates are made of gold and sapphire. In the past, the demons, afflicted by the fear of Lord Vishnu, had abandoned that city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)