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ramayan 7.3.23-24: ‘किन्तु उन प्रजापतिदेव ने मुझे रहने के लिए कोई स्थान नहीं बताया। अतः हे प्रभु! अब आप मेरे रहने के लिए उपयुक्त, सब प्रकार से उत्तम स्थान की खोज कीजिए। प्रभु! वह स्थान ऐसा होना चाहिए, जहाँ रहने से किसी प्राणी को कोई दुःख न हो।’॥23-24॥   |   ramayan सर्ग 7.3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  7.3.23-24 
निवासनं न मे देवो विदधे स प्रजापति:॥ २३॥
तं पश्य भगवन् कंचिन्निवासं साधु मे प्रभो।
न च पीडा भवेद् यत्र प्राणिनो यस्य कस्यचित् ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘किन्तु उन प्रजापतिदेव ने मुझे रहने के लिए कोई स्थान नहीं बताया। अतः हे प्रभु! अब आप मेरे रहने के लिए उपयुक्त, सब प्रकार से उत्तम स्थान की खोज कीजिए। प्रभु! वह स्थान ऐसा होना चाहिए, जहाँ रहने से किसी प्राणी को कोई दुःख न हो।’॥23-24॥
 
‘But that Prajapatidev did not tell me any place to live. Therefore, O Lord! Now you search for a place suitable for me to live, which is good in all respects. Lord! That place should be such, where living does not cause any pain to any creature.’॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)