श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.3.19-20h 
एतच्च पुष्पकं नाम विमानं सूर्यसंनिभम्॥ १९॥
प्रतिगृह्णीष्व यानार्थं त्रिदशै: समतां व्रज।
 
 
अनुवाद
यह पुष्पक विमान सूर्य के समान तेजस्वी है। इसे अपना वाहन बनाओ और देवताओं के समान बनो॥19 1/2॥
 
‘This is the Pushpaka Vimana which is as radiant as the Sun. Take this as your vehicle and become like the gods.॥ 19 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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