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तद् गच्छ बत धर्मज्ञ निधीशत्वमवाप्नुहि॥ १८॥
शक्राम्बुपयमानां च चतुर्थस्त्वं भविष्यसि।
अनुवाद
'धर्मज्ञ! तुम प्रसन्नतापूर्वक उस पद को स्वीकार करो और अक्षय निधियों के स्वामी बनो। इन्द्र, वरुण और यम के साथ तुम चौथे लोकपाल कहलाओगे।'
‘Dharmagya! You accept that position happily and become the owner of inexhaustible treasures. Along with Indra, Varuna and Yama, you will be called the fourth Lokpal. 18 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥