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ramayan 7.3.16-17h: वैश्रवण के वचनों से ब्रह्माजी का मन और भी संतुष्ट हो गया। उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक सभी देवताओं से कहा - 'बहुत अच्छा'।   |   ramayan सर्ग 7.3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.3.16-17h 
अथाब्रवीद् वैश्रवणं परितुष्टेन चेतसा॥ १६॥
ब्रह्मा सुरगणै: सार्धं बाढमित्येव हृष्टवत्।
 
 
अनुवाद
वैश्रवण के वचनों से ब्रह्माजी का मन और भी संतुष्ट हो गया। उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक सभी देवताओं से कहा - 'बहुत अच्छा'।
 
Brahmaji's mind was further satisfied with Vaishravana's words. He happily said to all the gods - 'Very good'. 16 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)