श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.3.15-16h 
अथाब्रवीद् वैश्रवण: पितामहमुपस्थितम्॥ १५॥
भगवँल्लोकपालत्वमिच्छेयं लोकरक्षणम्।
 
 
अनुवाद
यह सुनकर वैश्रवण ने अपने पास खड़े पितामह से कहा - 'प्रभो! मेरा उद्देश्य जगत् की रक्षा करना है, अतः मैं जगत् का रक्षक बनना चाहता हूँ।' ॥15 1/2॥
 
Hearing this, Vaishravana said to his grandfather standing near him - 'Lord! My intention is to protect the world, so I want to become the protector of the world.' ॥ 15 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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