श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.3.13-14h 
अथ प्रीतो महातेजा: सेन्द्रै: सुरगणै: सह॥ १३॥
गत्वा तस्याश्रमपदं ब्रह्मेदं वाक्यमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
तब उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर इन्द्र आदि देवताओं के साथ महाबली ब्रह्माजी उसके आश्रम में आये और इस प्रकार बोले -॥13 1/2॥
 
Then, pleased with his austerity, the mighty Brahma along with Indra and other gods came to his ashram and spoke thus -॥ 13 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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