Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.3.12-13h: हर हज़ार वर्ष पूरे होने पर वे एक नई तपस्या करते थे। पहले वे केवल जल ग्रहण करते थे। उसके बाद वे वायु पर रहने लगे; बाद में उसे भी त्याग दिया और पूर्णतः निराहार रहने लगे। इस प्रकार उन्होंने कई हज़ार वर्ष एक वर्ष के समान बिताए। | ramayan सर्ग 7.3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हर हज़ार वर्ष पूरे होने पर वे एक नई तपस्या करते थे। पहले वे केवल जल ग्रहण करते थे। उसके बाद वे वायु पर रहने लगे; बाद में उसे भी त्याग दिया और पूर्णतः निराहार रहने लगे। इस प्रकार उन्होंने कई हज़ार वर्ष एक वर्ष के समान बिताए।
After completion of every thousand years, he used to adopt a new method of penance. At first, he ate only water. After that, he started living on air; later on, he gave up even that and started living completely without food. In this way, he spent many thousand years like one year. 12 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥