Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.3.11: ऐसा विचारकर उन्होंने तप करने का निश्चय किया और फिर उन्होंने एक विशाल वन में हजारों वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करते हुए घोर तप किया ॥11॥ | ramayan सर्ग 7.3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तु वर्षसहस्राणि तपस्तप्त्वा महावने।
यन्त्रितो नियमैरुग्रैश्चकार सुमहत्तप:॥ ११॥
अनुवाद
ऐसा विचारकर उन्होंने तप करने का निश्चय किया और फिर उन्होंने एक विशाल वन में हजारों वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करते हुए घोर तप किया ॥11॥
Thinking this, he decided to perform penance and then he performed severe penance for thousands of years in a huge forest, abiding by strict rules. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥