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ramayan 7.3.1: पुलस्त्य के पुत्र मुनिवर विश्रवा थोड़े ही समय में अपने पिता के समान तपस्या में लग गए ॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.3.1 
अथ पुत्र: पुलस्त्यस्य विश्रवा मुनिपुङ्गव:।
अचिरेणैव कालेन पितेव तपसि स्थित:॥ १॥
 
 
अनुवाद
पुलस्त्य के पुत्र मुनिवर विश्रवा थोड़े ही समय में अपने पिता के समान तपस्या में लग गए ॥1॥
 
Pulastya's son, Munivar Vishrava, within a short time, engaged in penance like his father. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)