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ramayan 7.29.9: तुम दुःखी न होओ। शीघ्रता से मेरा रथ ले जाओ। मैं तुमसे दो बार कहता हूँ, मुझे अभी देवताओं की सेना के अंत में ले चलो॥9॥   |   ramayan सर्ग 7.29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.29.9 
विषादो नैव कर्तव्य: शीघ्रं वाहय मे रथम्।
द्वि: खलु त्वां ब्रवीम्यद्य यावदन्तं नयस्व माम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तुम दुःखी न होओ। शीघ्रता से मेरा रथ ले जाओ। मैं तुमसे दो बार कहता हूँ, मुझे अभी देवताओं की सेना के अंत में ले चलो॥9॥
 
You should not be sad. Take my chariot quickly. I tell you twice, take me right now to the end of the army of the gods.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)