श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.29.41 
नय रथमधिरोप्य वासवं
नगरमितो व्रज सेनया वृतस्त्वम्।
अहमपि तव पृष्ठतो द्रुतं
सह सचिवैरनुयामि हृष्टवत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
पुत्र! इन्द्र को रथ पर बिठाकर सेना सहित लंकापुरी जाओ। मैं भी अपने मन्त्रियों सहित शीघ्र ही प्रसन्नतापूर्वक तुम्हारे पीछे-पीछे आऊँगा।'
 
Son! Make Indra sit on the chariot and go with the army to Lankapuri. I too will be following you very soon and happily with my ministers.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)