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ramayan 7.29.22: तब रावण का पुत्र मेघनाद क्रोध से मूर्छित हो गया और रथ पर बैठकर अत्यन्त कुपित होकर शत्रुओं की भयंकर सेना में घुस गया।   |   ramayan सर्ग 7.29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.29.22 
ततो रथं समास्थाय रावणि: क्रोधमूर्च्छित:।
तत् सैन्यमतिसंक्रुद्ध: प्रविवेश सुदारुणम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तब रावण का पुत्र मेघनाद क्रोध से मूर्छित हो गया और रथ पर बैठकर अत्यन्त कुपित होकर शत्रुओं की भयंकर सेना में घुस गया।
 
Then Ravana's son Meghnad became unconscious with anger and sitting on the chariot, extremely enraged, he entered the fierce army of the enemy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)