श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.28.48 
तथैव च महाबाहुर्दशग्रीवो निशाचर:।
शक्रं कार्मुकविभ्रष्टै: शरवर्षैरवाकिरत्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार महाबाहु निशाचर दशग्रीव ने भी अपने धनुष से छोड़े हुए बाणों की वर्षा से इन्द्र को आच्छादित कर दिया ॥48॥
 
Similarly, the mighty-armed night-bearer Daśagriva also covered Indra with a shower of arrows shot from his bow. ॥48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)