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ramayan 7.28.42: जो प्राण त्यागकर भूमि पर पड़े हुए थे, उन समस्त राक्षसों का इस प्रकार मारा जाना जादू के समान आश्चर्यजनक प्रतीत हो रहा था ॥42॥   |   ramayan सर्ग 7.28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.28.42 
चित्रकर्म इवाभाति सर्वेषां रणसम्प्लव:।
निहतानां प्रसुप्तानां राक्षसानां महीतले॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो प्राण त्यागकर भूमि पर पड़े हुए थे, उन समस्त राक्षसों का इस प्रकार मारा जाना जादू के समान आश्चर्यजनक प्रतीत हो रहा था ॥42॥
 
The killing of all those demons, who had lost their lives and were lying on the ground, in this manner seemed astonishing as magic. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)