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ramayan 7.28.32: रावण ने अपने पुत्र को रोक दिया और स्वयं युद्ध के लिए खड़ा हो गया। तब रावण का पुत्र मेघनाद युद्धभूमि छोड़कर चुपचाप अपने रथ पर बैठ गया।   |   ramayan सर्ग 7.28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.28.32 
पुत्रं तं वारयित्वा तु स्वयमेव व्यवस्थित:।
सोऽपि युद्धाद् विनिष्क्रम्य रावणि: समुपाविशत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
रावण ने अपने पुत्र को रोक दिया और स्वयं युद्ध के लिए खड़ा हो गया। तब रावण का पुत्र मेघनाद युद्धभूमि छोड़कर चुपचाप अपने रथ पर बैठ गया।
 
Ravana stopped his son and himself stood up for the battle. Then Ravana's son Meghnad left the battlefield and quietly sat on his chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)