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ramayan 7.28.3: वह महाबली योद्धा अग्नि के समान तेजस्वी और इच्छानुसार चलने वाले रथ पर सवार होकर, धधकती हुई दावानल के समान देवताओं की सेना की ओर दौड़ा।   |   ramayan सर्ग 7.28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.28.3 
स रथेनाग्निवर्णेन कामगेन महारथ:।
अभिदुद्राव सेनां तां वनान्यग्निरिव ज्वलन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह महाबली योद्धा अग्नि के समान तेजस्वी और इच्छानुसार चलने वाले रथ पर सवार होकर, धधकती हुई दावानल के समान देवताओं की सेना की ओर दौड़ा।
 
That mighty warrior, riding on a chariot as brilliant as fire that moved as per his will, ran towards the army of gods like a blazing forest fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)