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ramayan 7.28.23: जब देवताओं के राजा इन्द्र ने देखा कि उनका पुत्र लुप्त हो गया है और देवताओं की सेना में भगदड़ मच गई है, तब उन्होंने मातलि से कहा, "मेरा रथ लौटा दो।"॥23॥   |   ramayan सर्ग 7.28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.28.23 
दृष्ट्वा प्रणाशं पुत्रस्य दैवतेषु च विद्रुतम्।
मातलिं चाह देवेशो रथ: समुपनीयताम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब देवताओं के राजा इन्द्र ने देखा कि उनका पुत्र लुप्त हो गया है और देवताओं की सेना में भगदड़ मच गई है, तब उन्होंने मातलि से कहा, "मेरा रथ लौटा दो।"॥23॥
 
When Indra, the king of gods saw that his son had disappeared and the army of gods was in a state of panic, he said to Matali, “Bring back my chariot.”॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)