Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.28.17: दैत्य और देवता एक दूसरे को पहचान नहीं पाए। वे इधर-उधर बिखर गए और सभी दिशाओं में भटकने लगे। 17.   |   ramayan सर्ग 7.28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.28.17 
नाभ्यजानन्त चान्योन्यं रक्षो वा देवताथवा।
तत्र तत्र विपर्यस्तं समन्तात् परिधावत॥ १७॥
 
 
अनुवाद
दैत्य और देवता एक दूसरे को पहचान नहीं पाए। वे इधर-उधर बिखर गए और सभी दिशाओं में भटकने लगे। 17.
 
The demons and the gods could not recognize each other. They were scattered here and there and started roaming around in all directions. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)