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ramayan 7.28.11: शचीपुत्र जयंत ने मेघनाद के सारथि को भी घायल कर दिया। तब क्रोधित मेघनाद ने भी जयंत को चारों ओर से घायल कर दिया। 11.   |   ramayan सर्ग 7.28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.28.11 
शचीसुतश्चापि तथा जयन्तस्तस्य सारथिम्।
तं चापि रावणि: क्रुद्ध: समन्तात् प्रत्यविध्यत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
शचीपुत्र जयंत ने मेघनाद के सारथि को भी घायल कर दिया। तब क्रोधित मेघनाद ने भी जयंत को चारों ओर से घायल कर दिया। 11.
 
Shachiputra Jayant also injured Meghnad's charioteer. Then an enraged Meghnad also injured Jayant from all sides. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)