श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.27.8 
वरप्रदानाद् बलवान् न खल्वन्येन हेतुना।
तत् तु सत्यं वच: कार्यं यदुक्तं पद्मयोनिना॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह ब्रह्माजी के वरदान के कारण ही शक्तिशाली हुआ है, अन्य किसी कारण से नहीं। कमलवत ब्रह्माजी ने जो वरदान दिया है, उसे सत्य सिद्ध करना हम सबका कर्तव्य है॥8॥
 
‘He has become powerful only because of the boon given by Lord Brahma; not for any other reason. It is the duty of all of us to make the boon true which Lord Brahma, the lotus-born being, has given.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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