श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.27.6 
स तु दीन: परित्रस्तो महेन्द्रो रावणं प्रति।
विष्णो: समीपमागत्य वाक्यमेतदुवाच ह॥ ६॥
 
 
अनुवाद
देवराज इन्द्र रावण से भयभीत हो गए, अतः वे दुःखी होकर भगवान विष्णु के पास आए और इस प्रकार बोले-॥6॥
 
Devraj Indra was afraid of Ravana. So he became sad and came to Lord Vishnu and said this -॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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