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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  7.27.50-51h 
तस्य नैवास्थि न शिरो न मांसं ददृशे तदा॥ ५०॥
गदया भस्मतां नीतं निहतस्य रणाजिरे।
 
 
अनुवाद
गदा का प्रहार होते ही सुमाली युद्धभूमि में पूरी तरह नष्ट हो गया। न उसकी हड्डियाँ, न सिर, न मांस कहीं दिखाई दे रहा था। उस गदा की अग्नि से सब कुछ भस्म हो गया।
 
As soon as he was struck by the blow, Sumali was completely destroyed in the battle field. Neither his bones nor his head nor his flesh could be seen anywhere. Everything was reduced to ashes by the fire of that mace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)