श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.27.5 
एवमुक्तास्तु शक्रेण देवा: शक्रसमा युधि।
संनह्य सुमहासत्त्वा युद्धश्रद्धासमन्विता:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र की यह बात सुनकर युद्ध में उसके समान पराक्रम दिखाने वाले महाबली देवता कवच आदि धारण करके युद्ध के लिए उद्यत हो गए ॥5॥
 
Upon hearing Indra say this, the mighty gods, who displayed prowess like him in battle, put on armour etc. and became eager for the war. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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