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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  7.27.49-50h 
सा तस्योपरि चोल्काभा पतन्ती विबभौ गदा॥ ४९॥
इन्द्रप्रमुक्ता गर्जन्ती गिराविव महाशनि:।
 
 
अनुवाद
उस पर गिरने वाली गदा उल्का के समान चमक रही थी, मानो इन्द्र द्वारा छोड़ा गया कोई विशाल शनिदेव जोर की गर्जना के साथ किसी पर्वत की चोटी पर गिर रहा हो। 49 1/2
 
The mace falling on him shone like a meteor, as if a huge Saturn released by Indra were falling on the top of a mountain with a loud thunder. 49 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)