श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.27.46-47h 
ततस्तस्य महाबाणैर्वसुना सुमहात्मना॥ ४६॥
निहत: पन्नगरथ: क्षणेन विनिपातित:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महात्मा वसु ने अपने विशाल बाणों से सुमाली के सर्पयुक्त रथ को क्षण भर में टुकड़े-टुकड़े करके गिरा दिया।
 
Thereafter Mahatma Vasu with his huge arrows smashed Sumali's snake drawn chariot into pieces and made it fall in a moment. 46 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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