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ramayan 7.27.43-44: जब सुमाली ने देवताओं को भगा दिया, तब आठवें वसु सवित्र को बड़ा क्रोध आया और वे अपनी रथ सेना के साथ आकर आक्रमणकारी राक्षस के सामने खड़े हो गए ॥43-44॥   |   ramayan सर्ग 7.27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 43-44
 
 
श्लोक  7.27.43-44 
ततो विद्राव्यमाणेषु दैवतेषु सुमालिना॥ ४३॥
वसूनामष्टम: क्रुद्ध: सावित्रो वै व्यवस्थित:।
संवृत: स्वैरथानीकै: प्रहरन्तं निशाचरम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब सुमाली ने देवताओं को भगा दिया, तब आठवें वसु सवित्र को बड़ा क्रोध आया और वे अपनी रथ सेना के साथ आकर आक्रमणकारी राक्षस के सामने खड़े हो गए ॥43-44॥
 
When the gods were chased away by Sumali, the eighth Vasu Savitra became very angry. He came with his chariot army and stood before the attacking demon. ॥43-44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)