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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.27.38-39h 
ततस्ते राक्षसा: सर्वे विबुधान् समरे स्थितान्॥ ३८॥
नानाप्रहरणैर्घोरैर्जघ्नु: शतसहस्रश:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त दैत्यों ने नाना प्रकार के घातक अस्त्र-शस्त्रों द्वारा युद्धस्थल में खड़े लाखों देवताओं का संहार करना आरम्भ कर दिया। 38 1/2॥
 
After that, all the demons started killing lakhs of gods standing in the battlefield with various types of deadly weapons. 38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)