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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.27.35-36h 
सैन्यै: परिवृतो हृष्टैर्नानाप्रहरणोद्यतै:॥ ३५॥
त्रासयन् शत्रुसैन्यानि प्रविवेश रणाजिरम्।
 
 
अनुवाद
वह उत्साही सैनिकों से घिरा हुआ था और विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित था। वह शत्रु सेना को भयभीत करते हुए युद्धभूमि में प्रवेश कर गया।
 
He was surrounded by enthusiastic soldiers and equipped with various types of weapons. He entered the battlefield terrifying the enemy forces. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)