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ramayan 7.27.33-34h: दैत्यों द्वारा आक्रमण किये जाने पर देवताओं की वह सेना सिंह द्वारा पीछा किये जाने वाले हिरणों की भाँति सभी दिशाओं में भाग गई।   |   ramayan सर्ग 7.27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.27.33-34h 
तद् दैवतबलं राम हन्यमानं निशाचरै:॥ ३३॥
प्रणुन्नं सर्वतो दिग्भ्य: सिंहनुन्ना मृगा इव।
 
 
अनुवाद
दैत्यों द्वारा आक्रमण किये जाने पर देवताओं की वह सेना सिंह द्वारा पीछा किये जाने वाले हिरणों की भाँति सभी दिशाओं में भाग गई।
 
After being attacked by the demons, that army of gods fled in all directions like deer chased by a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)