vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध
»
श्लोक 32-33h
श्लोक
7.27.32-33h
स दैवतगणान् सर्वान् नानाप्रहरणै: शितै:॥ ३२॥
व्यध्वंसयत् समं क्रुद्धो वायुर्जलधरानिव।
अनुवाद
क्रोध में आकर उसने नाना प्रकार के तीखे शस्त्रों से समस्त देवताओं को भगा दिया, जैसे वायु बादलों को तितर-बितर कर देती है।
In anger he chased away all the gods with various kinds of sharp weapons, just as the wind scatters the clouds.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas