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ramayan 7.27.23: इस बीच, जैसे-जैसे रात बीतती गई, रावण की सेना के युद्ध के लिए तैयार होने का शोर चारों ओर से सुनाई देने लगा।   |   ramayan सर्ग 7.27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.27.23 
एतस्मिन्नन्तरे नाद: शुश्रुवे रजनीक्षये।
तस्य रावणसैन्यस्य प्रयुद्धस्य समन्तत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस बीच, जैसे-जैसे रात बीतती गई, रावण की सेना के युद्ध के लिए तैयार होने का शोर चारों ओर से सुनाई देने लगा।
 
Meanwhile, as the night passed, the loud noise of Ravana's army getting ready for battle could be heard from all sides. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)