श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.27.19 
प्रतिजाने च देवेन्द्र त्वत्समीपे शतक्रतो।
भवितास्मि यथास्याहं रक्षसो मृत्युकारणम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘किन्तु देवेन्द्र! शतक्रतो! मैं आपको वचन देता हूँ कि समय आने पर मैं ही इस राक्षस के वध का कारण बनूँगा ॥19॥
 
‘But Devendra! Shatkrato! I pledge to you that when the time comes, I will be the reason for the death of this demon. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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