Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.27.18: मेरा स्वभाव है कि मैं युद्ध से शत्रु को मारे बिना नहीं लौटता; तथापि इस समय रावण वरदान से सुरक्षित है; अतः उससे विजय की इच्छा पूरी करना मेरे लिए कठिन है॥18॥ | ramayan सर्ग 7.27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरा स्वभाव है कि मैं युद्ध से शत्रु को मारे बिना नहीं लौटता; तथापि इस समय रावण वरदान से सुरक्षित है; अतः उससे विजय की इच्छा पूरी करना मेरे लिए कठिन है॥18॥
It is my nature that I do not return from a battle without killing my enemy; however, at this time Ravan is protected by a boon; therefore it is difficult for me to fulfill my desire for victory from him.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥