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ramayan 7.27.17: हे सुरेश्वर! दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूँ - आप मुझसे जो कह रहे थे कि 'उससे युद्ध करो', उसके उत्तर में मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप इस समय युद्धभूमि में राक्षस रावण का सामना करने के लिए न जाएँ॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 7.27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.27.17 
यत् तु मां त्वमभाषिष्ठा युध्यस्वेति सुरेश्वर।
नाहं तं प्रतियोत्स्यामि रावणं राक्षसं युधि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे सुरेश्वर! दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूँ - आप मुझसे जो कह रहे थे कि 'उससे युद्ध करो', उसके उत्तर में मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप इस समय युद्धभूमि में राक्षस रावण का सामना करने के लिए न जाएँ॥ 17॥
 
O Lord of Sureshwars! The second thing I want to say is this - in reply to what you were saying to me that 'you should fight with him' I request you to not go to the battlefield at this time to face the demon Ravana.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)