श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.27.16 
सर्वथा तु महत् कर्म करिष्यति बलोत्कट:।
राक्षस: पुत्रसहितो दृष्टमेतन्निसर्गत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘यह अत्यन्त बलवान राक्षस अपने पुत्र सहित आया हुआ है और सब प्रकार से महान पराक्रम दिखाएगा। मैं अपनी स्वाभाविक ज्ञान-दृष्टि से यह देख सकता हूँ॥16॥
 
‘This extremely powerful demon who has come with his son will display great valour in every way. I can see this with my natural vision of knowledge.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)