श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.27.14 
एवमुक्त: स शक्रेण देवो नारायण: प्रभु:।
अब्रवीन्न परित्रास: कर्तव्य: श्रूयतां च मे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र के ऐसा कहने पर भगवान नारायण बोले, 'देवराज! आप डरें नहीं। मेरी बात सुनिए।॥14॥
 
When Indra said this, Lord Narayana said, 'Devraj! You should not be afraid. Listen to me.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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