श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.27.11 
त्वं हि नारायण: श्रीमान् पद्मनाभ: सनातन:।
त्वयेमे स्थापिता लोका: शक्रश्चाहं सुरेश्वर:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
आप पद्मनाभ हैं - आपकी नाभि से यह जगत उत्पन्न हुआ है। आप सनातन भगवान श्रीमन नारायण हैं। आपने ही इन तीनों लोकों की स्थापना की है और आपने ही मुझे देवताओं का राजा इन्द्र बनाया है॥11॥
 
‘You are Padmanabha – the universe has originated from your navel. You are the eternal God Shriman Narayan. You have established these three worlds and you have made me the king of gods Indra.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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