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ramayan 7.26.56-57h: ज्यों ही जलती हुई अग्नि के समान प्रज्वलित करने वाला यह शाप नल के मुख से निकला, त्यों ही देवताओं की तुरहियाँ बजने लगीं और आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी॥56 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  7.26.56-57h 
तस्मिन्नुदाहृते शापे ज्वलिताग्निसमप्रभे॥ ५६॥
देवदुन्दुभयो नेदु: पुष्पवृष्टिश्च खाच्च्युता।
 
 
अनुवाद
ज्यों ही जलती हुई अग्नि के समान प्रज्वलित करने वाला यह शाप नल के मुख से निकला, त्यों ही देवताओं की तुरहियाँ बजने लगीं और आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी॥56 1/2॥
 
As soon as this curse, which was as burning as a burning fire, came out from the mouth of the pipe, the trumpets of the gods started ringing and flowers started raining from the sky. 56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)