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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  7.26.54-55h 
अकामा तेन यस्मात् त्वं बलात् भद्रे प्रधर्षिता॥ ५४॥
तस्मात् स युवतीमन्यां नाकामामुपयास्यति।
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, 'भद्र! रावण ने तुम्हारी अनिच्छा के बावजूद तुम्हें बलपूर्वक प्रताड़ित किया है। अतः आज से वह किसी अन्य कन्या के साथ, जो उसे नहीं चाहती, संभोग नहीं कर सकेगा।'
 
He said, 'Bhadra! Ravan has tortured you forcefully despite your unwillingness. Hence, from today onwards, he will not be able to have intercourse with any other girl who does not want him. 54 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)