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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.26.52-53h 
तस्य तत् कर्म विज्ञाय तदा वैश्रवणात्मज:॥ ५२॥
मुहूर्तात् क्रोधताम्राक्षस्तोयं जग्राह पाणिना।
 
 
अनुवाद
उस समय मात्र दो घण्टे में रावण के कृत्य का ज्ञान हो जाने पर वैश्रवण के पुत्र नलकूबर की आंखें क्रोध से लाल हो गईं और उसने हाथ में अग्नि ले ली।
 
At that time, in just two hours, upon realizing Ravana's deed, the eyes of Nalakubar, son of Vaishravana, became red with anger and he took fire in his hand. 52 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)