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ramayan 7.26.51-52h: यह सुनकर वैश्रवण के पुत्र नलकूबर को बड़ा क्रोध आया। रम्भ पर हुए इस घोर अत्याचार के विषय में सुनकर उसने एकाग्रचित्त होकर विचार किया।   |   ramayan सर्ग 7.26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.26.51-52h 
एतच्छ्रुत्वा तु संक्रुद्धस्तदा वैश्रवणात्मज:॥ ५१॥
धर्षणां तां परां श्रुत्वा ध्यानं सम्प्रविवेश ह।
 
 
अनुवाद
यह सुनकर वैश्रवण के पुत्र नलकूबर को बड़ा क्रोध आया। रम्भ पर हुए इस घोर अत्याचार के विषय में सुनकर उसने एकाग्रचित्त होकर विचार किया।
 
Hearing this, Vaishravana's son Nalakubar became very angry. On hearing of the great atrocity committed on Rambha, he concentrated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)