Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.26.50-51h: हे उत्तम व्रत करने वाले मेरे प्रिय! इस विवशता में मुझसे जो भूल हुई है, उसे क्षमा कर दीजिए। हे कोमल! स्त्री दुर्बल होती है, उसमें पुरुष के समान शारीरिक बल नहीं होता (इसीलिए मैं उस दुष्ट से अपनी रक्षा न कर सका)॥50 1/2॥ | ramayan सर्ग 7.26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं त्वमपराधं मे क्षन्तुमर्हसि सुव्रत॥ ५०॥
नहि तुल्यं बलं सौम्य स्त्रियाश्च पुरुषस्य हि।
अनुवाद
हे उत्तम व्रत करने वाले मेरे प्रिय! इस विवशता में मुझसे जो भूल हुई है, उसे क्षमा कर दीजिए। हे कोमल! स्त्री दुर्बल होती है, उसमें पुरुष के समान शारीरिक बल नहीं होता (इसीलिए मैं उस दुष्ट से अपनी रक्षा न कर सका)॥50 1/2॥
My dear one who observes the best fast! Please forgive me for the mistake I have committed in this helpless condition. Gentle one! A woman is weak, she does not have the same physical strength as a man (that is why I could not protect myself from that evil person)'॥ 50 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥