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ramayan 7.26.49-50h: प्रभु! मैं बार-बार प्रार्थना करती रही कि प्रभु! मैं आपकी पुत्रवधू हूँ, कृपया मुझे जाने दीजिए; परन्तु उन्होंने मेरी एक न सुनी और मुझे बलपूर्वक यातनाएँ दीं।   |   ramayan सर्ग 7.26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  7.26.49-50h 
याच्यमानो मया देव स्नुषा तेऽहमिति प्रभो॥ ४९॥
तत् सर्वं पृष्ठत: कृत्वा बलात् तेनास्मि धर्षिता।
 
 
अनुवाद
प्रभु! मैं बार-बार प्रार्थना करती रही कि प्रभु! मैं आपकी पुत्रवधू हूँ, कृपया मुझे जाने दीजिए; परन्तु उन्होंने मेरी एक न सुनी और मुझे बलपूर्वक यातनाएँ दीं।
 
Lord! I kept on praying again and again that Lord! I am your daughter-in-law, please let me go; but he did not listen to me and tortured me forcefully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)