Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.26.47-48h: शत्रुदमन वीर! मैं तुम्हारे पास आ रही थी, किन्तु उस राक्षस ने मुझे देखकर मेरा हाथ पकड़ लिया। फिर उसने पूछा - 'तुम किसकी पत्नी हो?'॥47 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  7.26.47-48h 
आयान्ती तेन दृष्टास्मि त्वत्सकाशमरिंदम॥ ४७॥
गृहीता तेन पृष्टास्मि कस्य त्वमिति रक्षसा।
 
 
अनुवाद
शत्रुदमन वीर! मैं तुम्हारे पास आ रही थी, किन्तु उस राक्षस ने मुझे देखकर मेरा हाथ पकड़ लिया। फिर उसने पूछा - 'तुम किसकी पत्नी हो?'॥47 1/2॥
 
Shatrudaman Veer! I was coming to you, but that demon saw me and caught my hand. Then he asked - 'Whose wife are you?'॥ 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)