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ramayan 7.26.35: ये सब अलंकार मैंने उसके लिए धारण किए हैं; जैसे वह मुझमें स्नेह रखता है, वैसे ही मेरा भी उसी में अगाध प्रेम है, अन्य किसी में नहीं॥35॥   |   ramayan सर्ग 7.26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.26.35 
तमुद्दिश्य तु मे सर्वं विभूषणमिदं कृतम्।
यथा तस्य हि नान्यस्य भावो मां प्रति तिष्ठति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ये सब अलंकार मैंने उसके लिए धारण किए हैं; जैसे वह मुझमें स्नेह रखता है, वैसे ही मेरा भी उसी में अगाध प्रेम है, अन्य किसी में नहीं॥35॥
 
I have worn all these adornments for him; just as he has affection for me, I too have deep love for him and no one else.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)