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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.26.20 
तां समुत्थाय गच्छन्तीं कामबाणवशं गत:।
करे गृहीत्वा लज्जन्तीं स्मयमानोऽभ्यभाषत॥ २०॥
 
 
अनुवाद
क्षण भर में ही वह कामदेव के बाणों का शिकार हो गया और उठकर उसने कहीं और जा रही रम्भा का हाथ पकड़ लिया। वह बेचारी असहाय स्त्री लज्जा से गड़ गई; किन्तु रात्रि-राक्षस ने हँसकर उससे कहा -॥20॥
 
In no time he fell prey to Kamadeva's arrows and standing up he caught hold of the hand of Rambha who was going somewhere else. The poor helpless lady was buried in shame; but the night-demon smiled and said to her -॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)