Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.26.10: वसन्त ऋतु के सभी पुष्पों की सुगन्ध से परिपूर्ण वृक्ष वायु के झोंके से फूल बरसा रहे थे, जिससे सारा पर्वत सुगन्धित हो रहा था ॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.26.10 
पुष्पवर्षाणि मुञ्चन्तो नगा: पवनताडिता:।
शैलं तं वासयन्तीव मधुमाधवगन्धिन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वसन्त ऋतु के सभी पुष्पों की सुगन्ध से परिपूर्ण वृक्ष वायु के झोंके से फूल बरसा रहे थे, जिससे सारा पर्वत सुगन्धित हो रहा था ॥10॥
 
The trees, filled with the fragrance of all the flowers of the spring season, were showering flowers on being blown by the wind, thus making the whole mountain fragrant. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)